Avani Lekhara
साल 2012 में महज 12 साल की उम्र में अवनी लखेरा की जिंदगी बदल गई। अपने कदमों से बुलंदिया हासिल करने का सपना देखने वाली अवनी साल 2012 में हुए एक्सीडेंट के चलते सीधे व्हीलचेयर पर आ गई। एक्सीडेंट (Accident) के महज तीन साल बाद ही अवनी ने शूटिंग (Shooting) को अपनी जिंदगी बनाया
अवनी के माता - पिता कौन हैं?
अवनी के पिता का नाम प्रवीण लखेरा और माता का नाम श्वेता लखेरा हैं। अवनी जयपुर ( राजस्थान) की रहने वाली हैं। अवनी के इस मुकाम तक पहुंचने में सबसे बड़ी भूमिका उनके माता-पिता की हैं। जब अवनी को पैरालाइसिस हुआ तो ये काफी टूट गई थी. उस समय उन्होंने सोचा कि अवनी (Teenager Shooter Avani Lekhara) को किसी खेल से जोड़ा जाए और आज परिणाम सबके सामने है. खेल के साथ ही अवनी पढ़ाई में भी काफी होशियार है। इसके साथ ही अन्य एक्टीविटी में भी अवनी सबसे अव्वल रहती है ।
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को टोक्यो पैरालंपिक की निशानेबाजी प्रतियोगिता में अवनी लखेरा को 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी और कहा कि यह वास्तव में भारतीय खेलों के लिए विशेष क्षण है।
उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘अविस्मरणीय प्रदर्शन अवनि लखेरा! कड़ी मेहनत की बदौलत स्वर्ण जीतने पर बधाई, जिसकी आप हकदार भी थीं। कर्मशील स्वभाव और निशानेबाजी के प्रति जज्बे से आपने ऐसा संभव कर दिखाया। भारतीय खेलों के लिए यह एक विशेष क्षण है, आपको भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
विश्व कप में भी दिखा चुकी हैं कमाल
अवनी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई मेडल जीत चुकी हैं। विश्व कप के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जयपुर की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा ने रजत पदक जीतने का गौरव हासिल किया था। राजस्थान में पिछले काफी समय से महिला खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के दम पर नित नए आयाम गढ़ रही हैं। टोक्यो पैरालंपिक में अवनि लेखरा ने महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच1 में पहला स्थान प्राप्त किया है। अवनि लेखरा ने इस इवेंट के क्वालीफिकेशन राउंड में 21 शूटर में सातवें स्थान पर रहकर फाइनल में एंट्री ली थी। अवनी ने 60 सीरीज के छह शॉट के बाद 621.7 का स्कोर बनाया। यह शीर्ष आठ निशानेबाजों में श्रेष्ठ था।
अभिनव की बायोग्राफी से मिली प्रेरणा
अवनी ने बताया एक्सीडेंट के बाद उनके पिताजी ने उन्हें अभिनव बिन्द्रा की बायोग्राफी लाकर दी। उससे उनकी निशानेबाजी में रुचि जगी और वह घर के पास में ही स्थित शूटिंग रेंज पर जाकर अभ्यास करने लगी। उन्होंने बताया कि कोच के निर्देशन के अनुसार अभ्यास करने के साथ मैंने अपना शत-प्रतिशत देना शुरू किया तो मुझे सफलताएं मिलती चली गईं।
Bahut hi achha
ReplyDeleteDhanyawad, and
DeleteKeep visiting